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शेयर बाजार ने रचा इतिहास: सेंसेक्स पहली बार 45 हजार के पार, विदेशी मुद्रा भंडार ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

न्यूज़ डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। शुक्रवार, 04 दिसंबर को शेयर बाजार ने इतिहास रच दिया। BSE सूचकांक सेंसेक्स ने 446 अंक की छलांग लगाकर 45 हजार के मनोवैज्ञानिक स्‍तर को पार कर 45,079.55 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर बंद हुआ। पूरे दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 45,148.28 का उच्च स्तर भी छुआ। निफ्टी भी छलांग लगाते हुए 13,150 अंक पर पहुंच गया। रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि PM मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और GST जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद कोरोना काल में भी आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

आइए देखते हैं मोदी सरकार के प्रयासों से भारत की अर्थव्यवस्था किस तरह से एक बार फिर बुलंदियों की तरफ बढ़ रही है-

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड
मोदी सरकार की नीतियों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर रिकॉर्ड बनाया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 13 नवंबर को खत्म हफ्ते में 4.277 अरब डॉलर बढ़कर 572.771 अरब डॉलर हो गया है। यह अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 5.526 अरब डॉलर बढ़कर 530.368 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस सप्ताह में स्वर्ण भंडार में 1.233 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 36.354 अरब डॉलर मूल्य का हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

कोरोना संकट के बावजूद देश में 16 प्रतिशत ज्यादा निवेश
कोरोना संकट के बावजूद 2020-21 के अप्रैल-अगस्त में देश में 27.1 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। यह 2019-20 की समान अवधि में आए 23.35 अरब डॉलर के निवेश से 16 प्रतिशत ज्यादा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार इस अवधि में पुनर्निवेश में आया कुल एफडीआई 13 प्रतिशत बढ़कर 35.73 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 के पहले पांच महीनों में यह 31.60 अरब डॉलर था। इसके साथ ही 2008 से 2014 में 231.37 अरब डॉलर की तुलना में 2014 से 2020 में कुल एफडीआई प्रवाह 55 प्रतिशत उछलकर 358.29 अरब डॉलर रहा। मंत्रालय के अनुसार सरकार की ओर से पिछले छह साल में किए गए सुधारों से एफडीआई में तेजी आई है। इसके साथ ही उन नीतिगत बाधाओं को भी दूर किया गया है, जो निवेश प्रवाह को बाधित कर रहे थे। निवेश को सुगम बनाने और कारोबार सुगमता के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

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अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा भारत- आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा। आईएमएफ ने कहा कि कोरोना के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट का अंदेशा है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था लंबी छलांग लगाने में सक्षम होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.8 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज हो सकती है और यह चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे तेजी से बढ़ने वाली उभरती अर्थव्यवस्था का दर्जा फिर से हासिल कर लेगी। चीन के 2021 में 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने का अनुमान है।

सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत- आईएमएफ
दुनिया भर में कोरोना संकट के बीच भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसके पहले हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही। आईएमएफ ने कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सबसे तेज रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के चलते 2020 का साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी खराब रहने वाला है, लेकिन इसके बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आइएमएफ के मुताबिक, इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1930 के महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।

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