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डीएमएफ फंड: खदान प्रभावित क्षेत्रों में जीवन स्तर में बढ़ोतरी के कार्य होेंगे

छत्तीसगढ़ में डीएमएफ फंड का उपयोग अब खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों की बेहतरी की योजनाओं में होगा। योजनाओं को तय करने में अब स्थानीय विधायक और खनन प्रभावित क्षेत्र की ग्राम सभा के सदस्यों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियमों में किए गए संशोधन से यह संभव हो सका है। संशोधन के अनुसार अब डीएमएफ की शासी परिषद में जिला कलेक्टर के स्थान पर प्रभारी मंत्री अध्यक्ष तथा क्षेत्रीय विधायक सदस्य होंगे। खनन कार्यों से प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों की ग्राम सभा के कम से कम 10 सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान भी परिषद में किया गया है। नये नियमों के अनुसार न्यास निधि में प्राप्त 50 प्रतिशत राशि का उपयोग प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण संशोधन के चलते स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास की योजना को अंतिम रुप दिया जाएगा। इससे स्थानीय आवश्यकताओं और जरुरतों की पूर्ति और समस्याओं के समाधान के कार्य ज्यादा बेहतर ढंग से कराए जा सकेंगे। संशोधन के अनुसार न्यास निधि से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों की पहचान तथा प्रभावित क्षेत्रों तथा वहां के निवासियों की आवश्यकता के अनुरुप 5 वर्षीय विजन डाक्यूमेंट तैयार करने का निर्णय लिया गया है। न्यास निधि से किए जाने वाले कार्यों में सतत् जीविकोपार्जन, सार्वजनिक परिवहन, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और युवा गतिविधियों को प्रोत्साहित करने जैसे नये सेक्टरों को शामिल किया गया है। इनमें सौर ऊर्जा आधारित परियोजना, स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन, प्रभावित परिवारों के सदस्यों को उच्च शिक्षा हेतु शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक शुल्क, छात्रावास शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। कृषि की उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहन देना एवं खनन प्रभावित वन अधिकार पट्टाधारियों के जीवन स्तर में सुधार एवं जीविकोपार्जन के उपायों को भी इसमें शामिल किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला खनिज संस्थान (डीएमएफ) मद में 1233.65 करोड़ रुपए का अंशदान प्राप्त हुआ है। इस राशि का उपयोग खनन प्रभावित अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, रोजगार, जीवनस्तर उन्नयन, सुपोषण आदि जनोपयोगी कार्यों के लिए होगा। इस मद से खर्च होने वाली राशि का सोशल आडिट किया जाएगा। खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था करने, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि विकास, सिंचाई, रोजगार, पोषाहार, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार, खेल व अन्य युवा गतिविधि, वृद्ध और निःशक्तजन कल्याण, संस्कृति संरक्षण के साथ ही अधोसंरचना विकास के कार्य भी कराए जा सकेंगे।

नियमों में संशोधन के बाद अब डीएमएफ राशि से खनन प्रभावित क्षेत्र के शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, डॉक्टरों, नर्सों की सेवाएं प्राप्त करने, यहां रहने वाले परिवारों के बच्चों को नर्सिंग, चिकित्सा शिक्षा, इंजीनियरिंग, विधि, प्रबंधन, उच्च शिक्षा, व्यवसायिक पाठ्यक्रम, तकनीकी शिक्षा, शासकीय संस्थाओं, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक शुल्क और छात्रावास शुल्क के भुगतान के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी इस मद से की जा सकेगी।

छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम-2015 में संशोधन कर खनन प्रभावित क्षेत्रों में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं। कृषि उत्पादों के संग्रहण, भंडारण एवं प्रसंस्करण, खाद्य प्रसंस्करण, लघु वनोपज प्रसंस्करण, वनौषधि प्रसंस्करण, खेती में उन्नत तकनीकों के प्रयोग, जैविक खेती, पशु नस्ल सुधार और गोठान विकास के कार्य भी अब डीएमएफ से हो सकेंगे।

डीएमएफ से कराए जाने वाले कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के लिए इस मद से कराए जाने वाले कार्यों की बेहतर निगरानी और उनका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। ऐसे जिले जहां डीएमएफ की राशि सालाना 25 करोड़ रूपए या इससे अधिक है, उन जिलों में प्रभावित क्षेत्रों व व्यक्तियों के चिन्हांकन, सर्वेक्षण, कार्यों की निगरानी तथा विजन डॉक्युमेंट तैयार करने न्यास में सूचीबद्ध संस्थाओं के माध्यम से सर्वेक्षण एवं सोशल ऑडिट कराया जाएगा। क्षेत्र के लिए चिन्हित आवश्यकताओं की पूर्ति और पांच साल का विजन प्लान तैयार करने के लिए नागरिक सामाजिक संगठनों की भी मदद ली जाएगी। जिन जिलों में डीएमएफ की वार्षिक प्राप्ति राशि 25 करोड़ रूपए से कम है, वहां ये कार्य जिले में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञों के माध्यम से कराए जाएंगे।

संशोधन के बाद डीएमएफ में प्राप्त राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों पर तथा शेष राशि अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावितों पर खर्च किए जाने का रास्ता खुल गया है। अब शासी परिषद में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामसभा के 10 सदस्य होंगे। इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया गया है। खनन क्षेत्र के ग्रामसभा के साथ ही नजदीक के ग्रामसभा के सदस्यों के नामांकन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अनुसूचित क्षेत्रों में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग से नामांकित किए जाएंगे।

*ए.पी.सोलंकी-जी.एस.केशरवानी

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