‘नंबरों के बदले सेक्स’ के आरोपों में कांग्रेस सांसद अकोइजम को राहत, JNU की बर्खास्तगी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के आदेश पर सोमवार, 2 नवंबर 2026 को रोक लगा दी। साथ ही अदालत ने JNU प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर थे।

दरअसल, विश्वविद्यालय की कुछ छात्राओं ने अकोइजम पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में 11 छात्राओं ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने मामले की जांच की थी।

जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर JNU ने 9 अक्टूबर 2026 को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर FIR दर्ज की थी।

बर्खास्तगी के बाद अकोइजम ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया और अपनाई गई कार्यवाही पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं थी।

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने JNU के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है। इस आदेश से अकोइजम को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, अदालत की यह अंतरिम रोक आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

गौरतलब है कि इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी विवाद हुआ था। भाजपा नेताओं ने अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी, जबकि कांग्रेस सांसद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती दी थी।

फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में सबकी नजरें विश्वविद्यालय के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। बहरहाल, आरोपों की सच्चाई और कानूनी जवाबदेही का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

इससे पहले अक्टूबर में दिल्ली पुलिस के समन पर अकोइजाम जांच में शामिल होने के लिए वसंत कुंज नॉर्थ थाने पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वह जांच में पूरा सहयोग करने आए हैं और नहीं चाहते कि उनकी अनुपस्थिति को जांच से बचने की कोशिश के रूप में देखा जाए।

अकोइजाम ने पूरे मामले को शुरुआत से ही “राजनीतिक मामला” बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें सच की जीत पर भरोसा है और कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने जेएनयू प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की तुलना “खाप पंचायत” जैसी कार्यवाही से भी की थी।

मामले को लेकर भाजपा महिला मोर्चा ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर कांग्रेस सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रुपकुमारी चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने की मांग की थी।

फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बावजूद अकोइजाम के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच जारी है जबकि उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट के फैसले पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।