नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में हर साल बढ़ते वायु प्रदूषण और दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना आदर्श समाधान प्रतीत होता है, लेकिन इस बात का फैसला करने के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि पूर्ण प्रतिबंध वास्तव में वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने में कितना प्रभावी है।
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सामने आए अदालत के आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के अवसर पर सीमित अवधि के लिए प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल 7 और 8 नवंबर को लागू होगी। इसके बाद 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से प्रभावी हो जाएगा।
2024 के प्रतिबंध के बाद भी AQI में खास सुधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से दिल्ली में वर्ष 2024 के दौरान लगाए गए पटाखों के पूर्ण प्रतिबंध का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे पर्याप्त आंकड़े पेश नहीं किए गए हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि उस प्रतिबंध से प्रदूषण की समस्या का समाधान हुआ या नहीं।
अदालत ने यह भी गौर किया कि वर्ष 2024 में पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों में कोई महत्वपूर्ण सुधार दिखाई नहीं दिया। ऐसे में केवल प्रतिबंध को ही प्रदूषण नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय मानने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार जरूरी है।
दो दिन ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित समय-सीमा तय की है।
- 7 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक।
- 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक।
अदालत ने निर्देश दिया है कि केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित और स्वीकृत ग्रीन पटाखों की ही बिक्री और इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित निर्माताओं के पास PESO का वैध लाइसेंस भी होना जरूरी है।
- अस्पतालों और स्कूलों के आसपास पटाखे चलाने पर रोक
अदालत ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगाया है। यह पाबंदी शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू होगी। संबंधित क्षेत्रों को नो-क्रैकर जोन घोषित कर उनकी पहचान और व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, पारंपरिक पटाखों को ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- पूर्ण प्रतिबंध 9 नवंबर से फिर लागू
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिवाली के लिए दी गई यह छूट अस्थायी है। 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पहले से लागू पूर्ण प्रतिबंध दोबारा प्रभावी हो जाएगा।
गौरतलब है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या केवल पटाखों तक सीमित नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसी गतिविधियां भी प्रदूषण में योगदान करती हैं।
अदालत ने अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की है कि वे प्रतिबंधों और नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करें। इसमें प्रदूषण की निगरानी, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई और ग्रीन पटाखों की बिक्री पर नियंत्रण से संबंधित जानकारी शामिल होगी।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या केवल पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर दिल्ली की जहरीली हवा से निजात पाई जा सकती है, या इसके लिए प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई करना जरूरी है।