बौद्ध परंपराओं के साथ छह नवदंपत्तियों ने लिया जीवनभर साथ निभाने का संकल्प

रायपुर।

मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के राज्य स्तरीय आयोजन में आज सामाजिक समरसता और सर्वधर्म सद्भाव का सुंदर दृश्य देखने को मिला, जब बौद्ध धर्म के अनुयायी छह नवदंपत्तियों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सान्निध्य में वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया। बौद्ध परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुए इस विवाह ने मानवीय मूल्यों, करुणा और समानता के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।इस अवसर पर बौद्धाचार्य भंते  ओमप्रकाश सहारे ने बताया कि बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार महाकारुणिक भगवान गौतम बुद्ध एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात नवदंपत्तियों ने त्रिशरण और पंचशील ग्रहण कर धम्म वंदना, बुद्ध वंदना एवं संघ वंदना की तथा जयमंगल अष्टगाथा के पाठ के साथ जयमाला द्वारा एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े तथा  कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने सभी नवदंपत्तियों के पास जाकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया और उनके सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य सभी वर्गों और धर्मों के परिवारों को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर प्रदान करना है, जिससे सामाजिक समरसता और भाईचारा और अधिक सुदृढ़ हो।इस सामूहिक विवाह में डोंगरगढ़ की आँचल टेम्बुलकर एवं आकाश इंदुलकर, छुरिया (राजनांदगांव) की देवनतीन एवं कृष्णा विजय शहरे, आकांक्षा रावत एवं अक्षय कोसरे, अंजली गेड़ाम एवं प्रताप कुमार, सुधा मेश्राम एवं अंकुश वासनिक तथा अर्चना गेड़ाम के विवाह बौद्ध परंपरा के अनुसार संपन्न हुए।मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत बौद्ध धर्म के इन नवदंपत्तियों का विवाह सामाजिक समानता, धार्मिक सहिष्णुता और संवेदनशील शासन की सशक्त मिसाल बना, जिसने समरस और समावेशी छत्तीसगढ़ की भावना को और मजबूत किया।

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