नक्सलमुक्त बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समाज प्रमुखों से मांगा सहयोग
रायपुर।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा आज जिला पंचायत कांकेर सभाकक्ष में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक लेकर बस्तर के नक्सल उन्मूलन के बाद चहुंमुखी विकास, सामाजिक एकता तथा आदिवासियों की पारंपरिक संस्कृति और विरासत को सहेजने, संरक्षित करने पर चर्चा की। जिसमें जिले में पेसा एक्ट का समुचित क्रियान्वयन और पारंपरिक देव स्थलों को संरक्षित करने जैसे विषयों पर द्विपक्षीय सकारात्मक चर्चा हुई। इस दौरान समाज प्रमुखों ने भी बारी बारी से सुझाव दिए।उप मुख्यमंत्री शर्मा ने जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में समाज प्रमुखों से कहा कि किसी समाज की परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों व पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। किसी बड़े लक्ष्य की सफलता समाज के सहयोग से ही संभव होती है और बस्तर में नक्सल उन्मूलन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की मुख्यधारा से टूट कर हिंसा का मार्ग अपनाने वाले युवाओं को वापस मुख्यधारा में लेकर आने में समाज प्रमुखों ने सराहनीय कार्य किया, जिसमें सुरक्षा बलों और जवानों का सतत् सहयोग मिला, जिसके फलस्वरूप आज बस्तर का लाल आतंक से मुक्त होना संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि आज वर्षों से बंद मेला-मड़ई, बाजार, हाट अब आबाद होने लगे हैं। पहले जहां रिश्तेदार भी घर आने में डरते थे वे भी बेखौफ आने जाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी वे पहली बार (नक्सलवाद से) आजाद होने का अनुभव कर रहे हैं।
सुविधा केंद्र के रूप में विकसित हो रहे अब सुरक्षा कैम्प
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कतिपय बाहरी लोग स्थानीय लोगों में भ्रम फैला रहे हैं कि बस्तर के संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। इस पर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि बस्तर का विकास बस्तर के युवाओं और लोगों के द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर ही ग्रामों का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए शुरुआत के रूप में सुरक्षा कैम्पों को सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान द्वारा स्थानीय संसाधनों से ही विकसित किया जाएगा।
197 गांवों के देव स्थलों का राजस्व रिकॉर्ड
समाज प्रमुखों से चर्चा के दौरान श्री शर्मा ने बताया कि इसी क्रम में अब बस्तर के देव स्थलों को संरक्षित करने के लिए 197 गांवों के देव स्थलों का राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हांकन कर उसे स्थायी पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है ताकि देव स्थलों को अच्छे से संरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार के द्वारा पेसा एक्ट को और भी सशक्त करने का कार्य किया गया है। इसके लिए पहली बार सरकार ने गांव गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर पेसा मोबिलाइजर, कोऑर्डिनेटर रखने का कार्य किया जा रहा है।
जेल से भी पुनर्वास की व्यवस्था
समाज प्रमुखों की जेल में बंद भटके हुए युवाओं के पुनर्वास पर चिंता के संबंध में उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि हमने हर युवा को मुख्यधारा में लाने के लिए जेल से भी पुनर्वास की व्यवस्था की है। इसके लिए समाज को भी प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि अब पुनर्वासित युवा खुद भी जेल में जाकर भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अन्य मतों में जाने वाले लोगों के साथ सामाजिक स्तर पर चर्चा कर शांति स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा शासन द्वारा भोले भाले ग्रामीणों की रक्षा के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का निर्माण भी किया गया है इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि समाज में वैचारिक चिंतन की आवश्यकता है, ग्रामों की संस्कृति के संरक्षण की जरूरत है। उन्होंने विकास के साथ स्थानीय लोगों का भी विकास के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि विकास के लिए समाज के प्रतिनिधि और प्रशासन के समन्वय के द्वारा आगे बढ़ना है सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव रखे। उन्होंने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए समाज की सहभागिता से बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करने का विश्वास दिलाया।इस अवसर राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी, कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर सहित गोंडवाना समाज के अध्यक्ष सुमेर सिंह नाग, सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव राजेश भास्कर सहित विभिन्न आदिवासी समाज के प्रमुखगण मौजूद थे।

