चीनी की कीमत 1 रुपये किलो और बढ़ी, अब इतने हो गए रिटेल दाम, एक महीने पहले से 34% ज्यादा
नई दिल्ली ।
चीनी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन तेजी आई। सरकारी आंकड़ों से इसका पता चलता है। फेस्टिव डिमांड बढ़ने के कारण पूरे देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत में 1 रुपये प्रति किलो से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। 26 अगस्त को औसत खुदरा कीमत 65.05 रुपये प्रति किलो थी। एक दिन पहले यह 63.97 रुपये प्रति किलो थी।सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को अनुमति दी है। सट्टेबाजी और जमाखोरी को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। इसके बाद मिल-गेट (एक्स-मिल) कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई। इसके बावजूद खुदरा चीनी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
1 महीने पहले से दाम 34% ज्यादा
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के अनुसार, औसत खुदरा कीमत एक महीने पहले दर्ज की गई 48.68 रुपये प्रति किलो की कीमत से 34% ज्यादा है। यह एक साल पहले के 46.27 रुपये प्रति किलो के स्तर से भी 41% अधिक है।बुधवार को अधिकतम खुदरा बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। वहीं, सबसे आम कीमत (मोडल प्राइस) 65 रुपये प्रति किलो थी।
खुदरा कीमतों पर असर में देरी
सरकार और चीनी उद्योग निकायों ने कहा है कि हाल के दिनों में एक्स-मिल कीमतों में गिरावट आई है। लेकिन, इस गिरावट का असर अभी तक खुदरा दामों में कम कीमत के रूप में नहीं दिखा है।खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि सरकार ने आयात की अनुमति दी है। सट्टेबाजी और जमाखोरी के खिलाफ एक्शन के बाद चीनी की मिल-गेट कीमत 18% घटी है। यह घटकर 55 रुपये प्रति किलो हो गई है।चोपड़ा ने बताया, ‘चीनी की मिल-गेट कीमतें अब कम होने लगी हैं। इन्हें मिलों ने बढ़ा दिया था। वे घटकर 55 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। आने वाले दिनों में और कम होंगी।’पिछले हफ्ते मिल-गेट कीमतें रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई थीं। चोपड़ा ने कहा कि यह बढ़ोतरी बाजार के बुनियादी कारणों से नहीं हुई थी। कारण है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
थोक कीमतों में भी बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को थोक चीनी की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी हुई। यह 60.36 रुपये प्रति किलो हो गई। एक महीने पहले औसत थोक कीमत 45.34 रुपये प्रति किलो थी। एक साल पहले यह 43.02 रुपये प्रति किलो थी।कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। सरकार ने डीलरों और बड़े पैमाने पर चीनी का इस्तेमाल करने वालों (जैसे ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों) पर स्टॉक लिमिट भी लगाई है। चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।
इतना होगा चीनी उत्पादन
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का अनुमान है कि सितंबर में खत्म होने वाले 2025-26 मार्केटिंग ईयर में इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल करने के बाद भारत का कुल चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन होगा।देश में मार्केटिंग ईयर की शुरुआत 50 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ हुई थी। देश में चीनी की डिमांड 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाने से पहले 8 लाख टन चीनी का एक्सपोर्ट किया गया था।
क्लाजिंग स्टॉक लगभग 35 लाख टन
इस्मा का अनुमान है कि सितंबर के आखिर में क्लोजिंग स्टॉक लगभग 35 लाख टन होगा। एसोसिएशन का अनुमान है कि इस मार्केटिंग ईयर में कुल 309 लाख टन चीनी के उत्पादन में से 30 लाख टन चीनी इथेनॉल बनाने के काम में लाई जाएगी।इस्मा ने शुरू में 2025-26 के लिए कुल चीनी उत्पादन का अनुमान 345 लाख टन लगाया था। बाद में खराब मौसम और कीड़ों के हमले से गन्ने की फसल पर असर पड़ने के कारण इस अनुमान को घटा दिया गया।

