ट्रंप के झटके का भारत ने ढूंढ लिया तोड़, अर्जेंटीना बनेगा हमारी दवाओं का नया अड्डा, खोल दिए गेट

नई दिल्‍ली ।

अमेरिकी टैरिफ नीतियों के जोखिम के बीच भारत को अर्जेंटीना के तौर पर मजबूत विकल्‍प मिला है। उसने भारतीय फार्मास्युटिकल सेक्टर की एंट्री आसान बनाने के लिए रुकावटें कम करने का वादा किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। भारत के लिए यह अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने का सही मौका है।मंत्रालय ने कहा कि इससे भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों को ज्‍यादा मौके मिलने की उम्‍मीद है। यह अर्जेंटीना में अच्छी क्वालिटी वाले सस्ते हेल्थकेयर तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

भारत को ऐसे फायदा देने की निकाली तरकीब

मंत्रालय ने आगे कहा, ‘अर्जेंटीना ने अपने फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत भारत को ‘एनेक्स II’ से ‘एनेक्स I’ में अपग्रेड करने का वादा किया है। साथ ही एंट्री में आने वाली रुकावटों को कम करने की दिशा में काम करने को भी कहा है।’यह मुद्दा इस हफ्ते वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की ब्यूनस आयर्स यात्रा के दौरान चर्चा में आया।वह भारत-अर्जेंटीना जॉइंट ट्रेड कमिटी (JTC) के लिए वहां गए थे। 24 अगस्त, 2026 को यह ब्यूनस आयर्स के पलासिओ सैन मार्टिन में आयोजित हुई थी।

भारत-अर्जेंंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार

भारत और अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 6.5 अरब डॉलर से ज्‍यादा हो गया। इसमें सालाना 17 फीसदी से अधिक की लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
माइनिंग, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश के मौकों पर भी चर्चा हुई। इसमें अर्जेंटीना के लिथियम सेक्टर में भारत की कंपनी KABIL की लगातार भागीदारी भी शामिल है।मंत्रालय ने कहा कि अर्जेंटीना में किसी भारतीय कंपनी की पहली लिथियम माइनिंग पहल कैटामार्का में KABIL की माइनिंग गतिविधियों में काफी प्रगति हुई है। दूसरे चरण की ड्रिलिंग पूरी हो गई है।

सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई

मंत्रालय ने आगे कहा कि सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें एविएशन, स्पेस टेक्नोलॉजी, टेलीकम्युनिकेशन और डिजिटल सर्विस जैसे सेक्‍टर शामिल हैं। इनसे दोनों देशों को और मौके मिल सकते हैं। खासकर 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में।यह यात्रा इसलिए भी अहम थी क्योंकि भारत और मर्कोसुर ब्लॉक मौजूदा प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) का विस्तार करना चाहते हैं।मर्कोसुर लैटिन अमेरिका का ट्रेड ब्लॉक है। इसमें ब्राजीज, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं। भारत-मर्कोसुर PTA 1 जून, 2009 को लागू हुआ था।मंत्रालय ने कहा कि ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर प्रगति और ‘डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ को अपनाने से व्यापार आसान होने और व्यवसायों के लिए सीमा-पार व्यापार ज्‍यादा कुशल बनने की उम्मीद है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.