डॉलर को झटका! मोदी और पुतिन बना रहे ऐसा जुगाड़ कि चुटकियों में होगा ट्रेड पेमेंट
नई दिल्ली ।
भारत-रूस आपसी व्यापार में लेनदेन के लिए डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करने के तरीके पर काम कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स का नया रास्ता खुल सकता है। व्यापार बढ़ाने की कोशिशों के तहत इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है।रूस के सबसे बड़े बैंक ‘स्बरबैंक’ (Sberbank) के सीईओ हरमन ग्रेफ ने कहा कि रूस का सेंट्रल बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस सिस्टम पर काम कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब दोनों देश आपसी व्यापार में पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों को कम करने और आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
अभी बस शुरुआत
नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए ग्रेफ ने कहा, ‘अभी तो यह बस शुरुआत है। लेकिन, हमें दोनों देशों के बीच सभी तरह के लेनदेन के लिए डिजिटल करेंसी में बहुत बड़ा मौका दिख रहा है।’ भारत में ब्रिक्स का सालाना समिट हो रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल करेंसी की मांग बढ़ेगी। इसमें तेजी से विकास होगा।रूस ने 1 सितंबर को सरकारी नियंत्रण वाले स्बरबैंक समेत अहम बैंकों के जरिए अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी ‘डिजिटल रूबल’ लॉन्च की थी। वहीं, भारत ने 2022 में पायलट आधार पर अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च की थी। अब इसका इस्तेमाल कुछ सरकारी कार्यक्रमों में हो रहा है।क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि रूस इस हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले समिट में ब्रिक्स सदस्यों और सहयोगी देशों के साथ व्यापार के लेनदेन के लिए डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल पर चर्चा करेगा। भारत ने भी आपसी व्यापार और सीमा-पार पेमेंट के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का समर्थन किया है।
सीमा-पार पेमेंट को तेज बनाना चाहता है ब्रिक्स
भारत और रूस के बीच यह बातचीत ब्रिक्स की उस बड़ी कोशिश के तहत हो रही है, जिसका मकसद सीमाओं के पार पैसे के लेनदेन के लिए ज्यादा बेहतर तरीके विकसित करना है।ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने बेहतर सीमा-पार पेमेंट सिस्टम की संभावनाओं पर चर्चा की है। एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में उन्होंने कजान और रियो घोषणाओं में नेताओं से मिले निर्देशों के आधार पर ‘ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव’ के तहत व्यावहारिक समाधान खोजने में ‘ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स’ (BPTF) के काम को सराहा।
किया गया है अध्ययन
स्टेटमेंट के मुताबिक, BPTF ने पेमेंट और मैसेजिंग चैनलों की सीमा-पार इंटरऑपरेबिलिटी (एक-दूसरे के साथ काम करने की क्षमता) का अध्ययन किया है। ब्रिक्स देशों की स्थानीय करेंसी का इस्तेमाल करके व्यापार के लेनदेन और निवेश को बढ़ावा देने पर चर्चा की है। ग्रुप ने कहा कि टास्क फोर्स को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करना चाहिए। यह समझना चाहिए कि क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए कोई एक ही तरीका सभी पर लागू नहीं हो सकता।बयान में कहा गया, ‘हम BPTF को प्रोत्साहित करते हैं कि वह चल रहे काम को आगे बढ़ाते हुए चर्चा जारी रखे ताकि ब्रिक्स देशों के बीच सीमा-पार भुगतान के लिए ऐसे व्यावहारिक समाधान निकाले जा सकें जो तेज, कम लागत वाले, ज्यादा सुलभ, कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित हों।’यह बयान नई दिल्ली में होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले आया है।
रुपये का जमावड़ा अब कोई बड़ी समस्या नहीं
भारत और रूस के लिए नए पेमेंट चैनल बनाने की कोशिश एक ऐसी समस्या का भी समाधान करती है जो 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने पर सामने आई थी। रूसी कंपनियों के पास भारतीय बैंकों में मौजूद वोस्ट्रो खातों में बड़ी मात्रा में रुपया जमा हो गया था।ग्रेफ ने कहा कि यह मुद्दा अब कोई बड़ी चुनौती नहीं है। कारण है कि कंपनियों ने उन रुपयों का इस्तेमाल करने के तरीके ढूंढ लिए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अतिरिक्त फंड को संघीय सरकार की प्रतिभूतियों में भी निवेश किया गया है। हालांकि, उन्होंने कोई आंकड़ा नहीं दिया।
ग्रेफ ने कहा, ‘अब हमारे व्यापार में यह समस्या नहीं है और हम दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।’आरबीआई ने वोस्ट्रो खातों में जमा रुपये का इस्तेमाल भारतीय प्रोजेक्ट्स या प्रतिभूतियों में निवेश के साथ भविष्य में सामान और सेवाओं की खरीद के लिए करने की अनुमति दी थी।
60 अरब डॉलर का व्यापार, पर बना हुआ है असंतुलन
2022 से भारत और रूस एक-दूसरे के टॉप 5 व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहे हैं, जब भारत ने रूसी तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की थी।भारत के वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत के आयात का बड़ा हिस्सा रूसी तेल का था। दोनों देश दशक के अंत तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। लेकिन, व्यापार का प्रवाह रूस की ओर बहुत अधिक झुका हुआ है।ग्रेफ ने कहा, ‘हमें रूसी बाजार में भारतीय निर्यात और अधिक अवसर लाने की जरूरत है। यही हमारा टारगेट है।’ उन्होंने कहा कि 50 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार असंतुलन को ठीक करने की जरूरत है।ब्रिक्स का व्यापक वित्तीय एजेंडा केवल भुगतान से कहीं आगे तक फैला हुआ है। वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा आवाज और प्रतिनिधित्व देने के लिए आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक समेत ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार की जरूरत को भी दोहराया।

