किसी को भी ईंधन की बिक्री पर लिमिट लगाने की इजाजत नहीं, सरकार को इसलिए देनी पड़ी चेतावनी

नई दिल्‍ली।

सरकार ने गुरुवार को साफ किया कि ईंधन की बिक्री पर लिमिट लगाना मंजूर नहीं है। वह प्राइवेट रिटेलर्स से ऐसा नहीं करने के लिए कहेगी। पेट्रोलियम सेक्रेटरी नीरज मित्तल ने कहा, ‘किसी को भी ईंधन की बिक्री पर लिमिट लगाने की इजाजत नहीं है। हम उन्हें बताएंगे कि यह मंजूर नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान रिटेलर्स को निर्देश जारी किए थे। सरकार का रुख नहीं बदला है।

इसलिए आई यह चेतावनी

यह बयान दो प्राइवेट ऑयल रिटेलर्स नायरा एनर्जी और जियो-बीपी की ओर से अपने रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री को सीमित (राशनिंग) करने के कुछ दिनों बाद आया है। ऐसा तब हुआ जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जबकि डीजल और पेट्रोल की पंप कीमतें जस की तस बनी रहीं। एक ऑयल मार्केटिंग कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने कहा कि उन्हें डीजल के हर लीटर पर लगभग 50 रुपये का नुकसान हो रहा था।GOBARdhan स्कीम के लॉन्च के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि मंत्रालय प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स के ‘संपर्क में’ है। लेकिन, उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।

रिपोर्ट्स में किया गया था यह दावा

ऐसी रिपोर्ट्स आईं कि जहां जियो-बीपी ने प्रति कस्टमर डीजल की बिक्री को 50 लीटर तक सीमित कर दिया। वहीं, नायरा एनर्जी के आउटलेट्स पर यह लिमिट हर ट्रांजैक्शन पर 70 से 200 लीटर के बीच थी।एक सूत्र ने बताया कि यह लिमिट तब लागू की गई जब बड़ी संख्या में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्टमर्स ने भी रिटेल कस्टमर्स के लिए बने आउटलेट्स से थोक में डीजल खरीदना शुरू कर दिया। थोक डीजल लगभग 50 रुपये प्रति लीटर महंगा होता है।जियो-बीपी ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह मोबिलिटी और ट्रांसपोर्टेशन की जरूरतों के लिए फ्यूल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठा रही है। खासकर इंडस्ट्रियल और अन्य नॉन-ट्रांसपोर्ट यूजर्स की मांग को देखते हुए। कंपनी ने कहा कि उसके सभी मोबिलिटी स्टेशन चालू हैं और उनमें पर्याप्त स्टॉक है।नायरा एनर्जी ने भी एक बयान में कहा कि वह अपने देशव्यापी डीलर रिटेल नेटवर्क में फ्यूल की सप्लाई बनाए हुए है। अपने कस्टमर्स के लिए फ्यूल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।कंपनी ने कहा, ‘हम भारतीय बाजार की सेवा करने और देशभर में फ्यूल की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

GOBARdhan स्कीम क्‍या है?

पुरी ने गुरुवार को भारत मंडपम में आधिकारिक तौर पर GOBARdhan स्कीम लॉन्च की। इस स्कीम का मकसद खेती के अवशेष, मवेशियों के गोबर, म्युनिसिपल ऑर्गेनिक वेस्ट और अन्य बायोमास को कंप्रेस्ड बायोगैस, ऑर्गेनिक खाद और अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स में बदलना है। साथ ही ग्रामीण आय को बढ़ाना और कचरे को कम करना है।23,731 करोड़ रुपये के कुल खर्च वाली यह योजना कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भारत के भविष्य के एनर्जी मिक्स का एक अहम हिस्सा बनाएगी। इसका मकसद देश में CBG का घरेलू उत्पादन लगभग दस गुना बढ़ाना, बड़े पैमाने पर प्राइवेट इंवेस्‍टमेंट जुटाना और पूरे देश में एक मजबूत सर्कुलर बायो-इकोनॉमी बनाना है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.