विश्व
पुष्टि - 221,140,621
मृत्यु - 4,575,780
ठीक- 197,635,720
भारत
पुष्टि - 32,988,673
मृत्यु - 440,567
ठीक- 32,138,092
महाराष्ट्र
पुष्टि - 64,82,117
मृत्यु - 1,37,707
ठीक- 62,88,851
केरल
पुष्टि - 41,81,137
मृत्यु - 21,422
ठीक- 39,09,096
कर्नाटक
पुष्टि - 29,54,047
मृत्यु - 37,401
ठीक- 28,98,874
तमिलनाडु
पुष्टि - 26,21,086
मृत्यु - 35,000
ठीक- 25,69,771

अजब प्रेम की गजब कहानी: बना डाला पत्नी का मंदिर

न्यूज़ डेस्क। गत वर्ष कर्नाटक से एक समाचार आया था जिसमें बताया गया था कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी की मृत्यु होने के बाद उसकी सिलिकॉन की मूर्ति बनवाई और फिर उन्होंने उस मूर्ति के साथ अपने नए घर में प्रवेश किया, जिसका सपना उनकी पत्नी ने देखा था। और अब एक और ऐसा मामला सामने आया है जो इससे भी बढक़र है। यह किस्सा प्रेम की अजब दास्तां है।

कहते हैं अपनों को खोने के बाद उन्हें वो लोग बहुत याद करते हैं जो उन्हें सच्चा प्रेम करते हैं। ऐसे ही कुछ हैं मध्यप्रदेश के शाजापुर के नारायण सिंह जिन्होंने अपने प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। नारायण सिंह ने अपनी पत्नी की मृत्यु होने के बाद उनसे अत्यधिक प्रेम के चलते उनका मंदिर ही बनवा डाला। अब हर दिन सुबह शाम नारायण सिंह और उनके बेटे इस मूर्ति की पूजा अर्चना करते हैं। दरअसल उनके बेटे भी यही चाहते थे कि मां भले ही इस दुनिया से चली गई हो लेकिन इस प्रतिमा के तौर पर सदैव उनके साथ रहे इसी के चलते सभी अब माँ का पूजन करते हैं और उन्हें याद करते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार शाजापुर जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर सांपखेड़ा गांव में रहने वाले नारायण सिंह की पत्नी गीताबाई की कोरोना बीमारी के चलते मौत हो गई थी। नारायण सिंह धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और उन्हें अपनी पत्नी से बेहद लगाव था। केवल वही नहीं बल्कि उनके बेटे भी अपनी मां की मौत के बाद टूट से गए थे। ऐसे में बेटों और नारायण सिंह ने पत्नी की स्मृति में घर के बाहर एक मंदिर बनाने का सोचा और अब सभी ने मंदिर बनवाने की सोच को मूर्त रूप दिया है।

पत्नी की मौत के तीसरे ही दिन इनके बेटों ने अलवर राजस्थान में गीता बाई की मूर्ति बनवाने का आर्डर दिया और डेढ़ माह बाद तीन फीट बड़ी यह सुन्दर प्रतिमा बनकर आ गई। उसके बाद परिजनों द्वारा अपने घर के बाहर एक छोटा सा मंदिर बनाकर उसमें पूरे विधि विधान के साथ इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.