इस बार 8 बेहद शुभ संयोग के साथ हाथी पर सवार होकर आएंगी मां जगदंबे

शारदीय नवरात्र का शुभारंभ कल रविवार को हो रहा है। समापन 8 अक्टूबर को होगा। इसी दिन से रामनगरी में देवी मां के जयकारे गूंजने शुरू हो जाएंगे। 10 दिनों तक रामनगरी शक्ति उपासना में निमग्न होगी। देवी भागवत पुराण में बताए गए नियम के अनुसार माता इस बार गज यानि हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। माता का हाथी पर सवार होकर आना शुभ है जो अच्छी वर्षा और उन्नत कृषि का सूचक है। हालांकि माता नंगे पाव बिना वाहन के विदा होंगी जो कि शुभ नहीं माना गया है। इस बार पूरे नौ दिन का नवरात्र होगा, कोई भी तिथि का क्षय नहीं है।

इस बार नवरात्र में आठ बेहद शुभ संयोग बने हैं। ज्योतिषाचार्य आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि 29 सितंबर को नवरात्र आरंभ होगा। नवरात्र नौ दिनों का होता है और दसवें दिन माता का विसर्जन किया जाता है। लेकिन ऐसा हो पाना दुर्लभ संयोग माना गया है। क्योंकि कई बार तिथियों का क्षय होने से नवरात्र के दिन कम हो जाते हैं।

लेकिन इस बार पूरे नौ दिन का नवरात्रि होगा। दसवें दिन देवी की विदाई होगी। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नवमी पूजा व 8 अक्तूबर को विसर्जन होगा। नवरात्र का आरंभ रविवार को हो रहा है और समापन मंगलवार को होगा। नवरात्र में दो सोमवार व दो रविवार आने वाले हैं जो कि फलदायी हैं।

आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि इस वर्ष हस्त नक्षत्र में नवरात्र का आरंभ हो रहा है। इस नक्षत्र को ज्ञान, मुक्ति और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस साल नवरात्र में दूसरे दिन की पूजा यानी 30 सितंबर, चौथे दिन की पूजा दो अक्तूबर को अमृत सिद्ध योग बन रहा है। पूरे नवरात्र में चार सर्वाथ सिद्धि योग भी बन रहे हैं। 29 सितंबर, 2,6 व 7 अक्टूबर को यह योग बन रहे हैं जो कि सिद्धि प्रदायक हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 9:45 बजे से 12 बजे तक है। यदि अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना चाहते हैं तो 11:23 से 12:10 के मध्य करें। यह सर्वोत्तम है। सप्तमी तिथि 5अक्टूबर शनिवार को दोपहर 2:03 मिनट तक है इसलिए निशीथव्यापनी अष्टमी इसी दिन अर्थात 5 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी, लेकिन व्रत के लिए अष्टमी 6 अक्टूबर को होगी। दुर्गा विसर्जन 7 अक्टूबर को तथा विजयादशमी 8 अक्तूबर को मनाई जाएगी।

कलश स्थापना का सामान

मिट्टी का कलश, ढक्कन, जौ, साफ मिट्टी, रक्षासूत्र, लौंग, इलायची, रोली और कपूर, आम के पत्ते, पान के पत्ते, साबुत सुपारी, अक्षत, नारियल, फूल, फल, चावल, गेहूं। लाल चुनरी के साथ लाल चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेंहदी, बिंदी, शीशा, कंघी।

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