विश्व
पुष्टि - 326,836,658
मृत्यु - 5,553,780
ठीक- 266,449,527
भारत
पुष्टि - 37,122,164
मृत्यु - 486,094
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महाराष्ट्र
पुष्टि - 71,24,278
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तमिलनाडु
पुष्टि - 28,91,959
मृत्यु - 36,956
ठीक- 27,36,986

मुख्यमंत्री ने किया अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेताओं सम्मेलन की प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि, उद्यानिकी एवं वनोपज, सहित हैण्डलूम कोसा आदि विविध उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन एवं विक्रय को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में आज से प्रारंभ तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेताओं सम्मेलन की प्रदर्शनी का फीता काटकर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा जल संसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, मुख्य सचिव सुनील कुजूर, अपर मुख्य सचिव के डी पी राव, कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर एस.के. पाटिल, प्रमुख सचिव कृषि, ग्रामोद्योग विभाग मनिंदर कौर द्विवेदी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदर्शनी के एक-एक स्टाल का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में कृषि विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं विभिन्न जिलों के स्व-सहायता समूहों तथा एफ.पी.ओ. द्वारा अपने उत्पाद का प्रदर्शन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने इन स्टालों में उपस्थित किसानों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, कृषि वैज्ञानिकों और उत्पादकों से चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बनाये जा रहे मुनगा पाउडर जो कैलशियम, विटामिन सी, आयरन आदि से काफी समृद्ध है, की तारीफ की। उन्होंने यहां रागी, कोदो, कुटकी आदि परम्परागत कृषि उत्पादों से बनाये गए पौष्टिक बिस्किट केक आदि का भी अवलोकन कर उसकी तारीफ की।

इस प्रदर्शनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ का धान, लाल चावल, काला चावल, आर्गेनिक विष्णुभोग चांवल, अन्य सुगंधित धान की पारंपरिक किस्में व कोदो, कुटकी, रागी, जैसे पारंपरिक एवं बहूमूल्य कृषि उत्पाद तथा मक्का, मखाना, चना, लाल मसूर, सोयाबीन, रामतिल, तिल, अलसी, फल-सब्जी जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, बैगन, हरा मटर, शिमला मिर्च, टमाटर, गवारफल्ली, मूली, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी, पपीता, सीताफल, लिची, ड्रैगनफु्रट, आंवला, कटहल, केला, नासपत्ती, एप्पल बेर, बेल, काजू, नींबू, गेंदा तथा विभिन्न फूलों गेंदा, गुलाब, ग्लेडिलस आदि को प्रदर्शित किया जा रहा है।

इसी तरह वनोपज के अंतर्गत मुख्य रूप से महुआ, महुआ बीज, इमली, साल बीज, औषधीय पौधे जैसे कालमेघ, बेहड़ा, हर्रा, चारगुठली, गोंद, लाख, नागरमोथा, शहद, त्रिफला, अश्वगंधा, सफेद मूसली आदि भी प्रदर्शित किए गए हैं। प्रदर्शनी में हैण्डलूूम, कोसा, सिल्क इत्यादि उत्पादों, साड़ी, दुप्पट्टा, शाल, जेकेट आदि को भी प्रदर्शित किया गया है। सम्मेलन के तीसरे दिन 22 सितम्बर को यह प्रदर्शनी आम जनता के अवलोकन तथा क्रय-विक्रय के लिए खुली रहेगी।

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