शिवलिंग पर जल… आदि चढ़ाने के बाद चढ़ाएं शमी के पत्ते, शनि और गणेशजी को भी चढ़ाते हैं शमी के पत्ते

धर्म डेस्क। अभी महादेव का प्रिय माह श्रावण मास चल रहा है। शिव पूजा में शिवलिंग पर अलग-अलग चीजें चढ़ाई जाती है। इन चीजों में फूल-पत्तियां का विशेष महत्व है। शिवजी को बिल्व पत्र के साथ ही शमी के पत्ते भी अर्पित करना चाहिए। देवी-देवताओं को पूजा के दौरान फूल और पत्तियों को चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। भगवान शिव को बिल्व पत्र बहुत प्रिय होता है तो वहीं भगवान गणेश को दूर्वा अतिप्रिय है। हम यह देखते हैं कि आमतौर पर शमी के पत्ते शनि देव को चढ़ाएं जाते हैं, लेकिन इस बात की जानकारी कम लोगों को होगी की शमी का पत्ते शिव जी को चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं साथ ही गणेश जी को भी शमी के पत्ते पसंद आते हैं।

मंत्र बोलकर चढ़ाएं शमी के पत्ते
सावन में रोज सुबह शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में गंगाजल या पवित्र जल में गंगाजल, चावल, सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर ‘ऊँ नम: शिवाय’ मंत्र बोलते हुए अर्पित करें। जल चढ़ाने के बाद शिवजी को चावल, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र, जनेऊ और मिठाई के साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ाएं।

शमी पत्ते चढ़ाते समय ये मंत्र बोलें- अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च। दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।

शमी पत्र चढ़ाने के बाद शिवजी की धूप, दीप और कपूर से आरती कर प्रसाद ग्रहण करें।

गणेशजी को भी चढ़ाएं शमी के पत्ते

शमी के पत्ते गणेश जी को उतना ही प्रिय है, जितना की दूर्वा प्रिय है। मान्यता है कि शमी के वृक्ष में शिव जी का वास होता है। गणेश उत्सव के दौरान जो भी व्यक्ति शमी के पत्ते को चढ़ाता है। उससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश उसे तेज बुद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

अगर किसी के घर में शमी का पेड़ लगा होता है तो उसके घर में कभी किसी तरह की परेशानी नहीं आती हैं। साथ ही इसे घर में लगाने से पहले सही दिशा का पता करना जरूरी होता है।

गणेशजी की पूजा में भी चावल, फल-फूल, सिंदूर के साथ ही शमी के पत्ते भीचढ़ाना चाहिए।

श्रीराम ने किया था शमी वृक्ष का पूजन

शमी वृक्ष को पूजनीय माना गया है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद श्रीराम ने शमी वृक्ष का पूजन किया था। एक अन्य मान्यता ये है कि महाभारत के समय पांडवों ने अपने अज्ञातवास में शमी के वृक्ष के नीचे ही अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे।

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