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सिविल सर्विसेज प्रशिक्षुओं को अफसरशाहियों को रौब वाली छवि छोड़ने का प्रयत्न होना चाहिए : PM मोदी

केवडिया (गुजरात) । प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी आज सरदार पटेल की 144वीं जयंती के अवसर पर गुजरात पहुंचे हुए हैं। जहां उन्होंने सुबह में च्यू ऑफ यूनिटी पहुंचेंगे और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद अब पीएम मोदी केवडिया में सिविल सेवा प्रशिक्षुओं को संबोधित करने के लिए पहुंचे हुए हैं। सिविल सेवा प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सिविल सेवा को राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता का अहम माध्यम बनाने का विजन स्वयं सरदार पटेल का था।

PM मोदी ने कहा कि सिविल सर्विसेज का इंटीग्रेशन आज से शुरू हो रहा है। ऐसे में यह अपने आप में एक रिफॉर्म है। मैं इससे जुड़े सभी प्रशासकों और भागीदारों को बधाई देना चाहता हूं। सरदार साहब ने ही याद दिलाया था कि ये ब्यूरोकेसी ही है जिसके भरोसे हमें आगे बढ़ना है, जिसने रियासतों के विलय में अहम योगदान दिया था। सरदार पटेल ने दिखाया है कि सामान्य जन के जीवन में सार्थक बदलाव के लिए हमेशा एक बुलंद इच्छाशक्ति को होना जरूरी होता है। आज भारत तेजी से बदल रहा है।

कभी अभावों में चलनी वाली व्यवस्था आज विपुलता की तरफ बढ़ रही है। आज देश में विपुल युवा शक्ति, विपुल युवा भंडार और आधुनिक तकनीक है। अपने सभी निर्णयों को आप ब्यूरोक्रेट्स ने दो कसौटियों पर जरूर कसना चाहिए। एक, जो महात्मा गांधी ने रास्ता दिखाया था कि आपका फैसला समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति की आशा, आकांक्षाओं को पूरा करता है या नहीं।

दूसरा, आपका फैसला इस कसौटी से कसना चाहिए कि उससे देश की एकता, अखंडता को बढ़ावा मिले। ब्यूरोक्रेसी और सिस्टम आज दो ऐसे शब्द बन गए हैं जो अपने आप में नेगेटिव परसेप्शन बन गया है। आखिर ये हुआ क्यों? जबकि अधिकतर अफसर मेहनती भी हैं। सिविल सेवाओं को लेकर अफसरशाही की, रौब की एक छवि रही है। इस छवि को छोड़ने में कुछ लोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। इस छवि को छोड़ने का पूरा प्रयत्न होना चाहिए।

PM मोदी ने कहा कि हमारे फैसलों और नीतियों को लेकर जो फीडबैक आता है उसका ईमानदार आंकलन जरूरी है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो हमारी आंखों और कानों अच्छा लगे, वही देखना और सुनना है।

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