क्या है Orthorexia Nervosa? जिसमें हेल्दी खाना भी बन जाता है बीमारी
आज के समय में हेल्दी भोजन को लेकर जागरूकता बढ़ना अच्छी बात है। कम प्रोसेस्ड फूड खाना, पर्याप्त फल-सब्जियां लेना, चीनी-नमक का सेवन कम करना और बैलेंस्ड डाइट अपनाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन क्या होता है जब “हेल्दी खाने” की कोशिश इतनी ज्यादा बढ़ जाए कि व्यक्ति का पूरा जीवन खाने के नियमों के इर्द-गिर्द घूमने लगे? यही से Orthorexia Nervosa जैसी स्थिति की चर्चा शुरू होती है। इसमें व्यक्ति का ध्यान सिर्फ स्वस्थ भोजन खाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह खाने की “शुद्धता” या “हेल्दीनेस” को लेकर अत्यधिक और कठोर चिंता करने लगता है। अगर वह अपने बनाए नियमों से हटकर कुछ खा ले तो अपराध बोध, एंग्जायटी या तनाव महसूस हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Orthorexia Nervosa को अभी DSM-5 या ICD को स्वतंत्र मनोचिकित्सकीय निदान के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।
ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा क्या है?
नेशनल ईटिंग डिसऑर्डर्स एसोसिएशन के अनुसार ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा शब्द का इस्तेमाल ऐसी स्थिति के लिए किया जाता है जिसमें व्यक्ति “हेल्दी” या “pure” भोजन को लेकर इतना कठोर हो जाता है कि उसका खाना, सोच, व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ हेल्दी खाना पसंद करना ऑर्थोरेक्सिया नहीं है। समस्या तब मानी जाती है जब स्वस्थ आहार से जुड़ी सोच इतनी कठोर और जुनून बन जाए कि व्यक्ति की सोशल लाइफ, मानसिक स्वास्थ्य, न्यूट्रिशन या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे।
हेल्दी ईटिंग और ऑर्थोरेक्सिया में क्या अंतर है?
हेल्दी ईटिंग और ऑर्थोरेक्सिया के बीच सबसे बड़ा अंतर फ्लेक्सिब्लिटी और साइकोलॉजिकल प्रभाव का है।
एक व्यक्ति हेल्दी डाइट अपनाते हुए भी कभी पिज्जा, मिठाई या बाहर का खाना खा सकता है। वह अगले मील में सामान्य बैलेंस डाइट पर वापस आ जाता है और इस वजह से खुद को असफल नहीं मानता। इसके विपरीत, ऑर्थोरेक्सिक व्यवहार में व्यक्ति अपने लिए आहार संबंधी नियम बहुत कठोर बना सकता है। उदाहरण के लिए वह कुछ सामग्री को “पूरी तरह खराब” मानकर उनसे हर कीमत पर बचने लगे या रेस्टॉरेंट में खाने को लेकर इतना चिंतित हो जाए कि बाहर खाना ही छोड़ दे।
कौन-से व्यवहार Orthorexia की ओर इशारा करते हैं?
ईटिंग डिसऑर्डर्स ऑफ विक्टोरिया व अन्य स्रोतों के अनुसार हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते। फिर भी कुछ व्यवाहरिक जोखिम संकेत हो सकते हैं। जिनके आधार पर समझा जा सकता है कि व्यक्ति को ऑर्थोरेक्सिया हो सकता है।
खाने की शुद्धता को लेकर अत्यधिक चिंता
व्यक्ति भोजन को लगातार साफ, शुद्ध, टॉक्सिक या अनहेल्दी जैसी कैटगरी में बांट सकता है और थोड़े से बदलाव को भी गंभीर मान सकता है। इससे व्यक्ति भोजन करने के लिए ज्यादा सतर्क बना रहता है, जो उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
आहार संबंधी नियमों में लगातार बढ़ना
शुरुआत में केवल प्रोसेस्ड फूड छोड़ना लक्ष्य हो सकता है। बाद में व्यक्ति शुगर, ग्लूटेन, डेयरी, ऑयल, प्रिजर्वेटिव या दूसरे आहार को भी बिना मेडिकल जरूरत के पूरी तरह हटाने लगे। ऐसे में व्यक्ति के पास खाने के विकल्प ही कम बचने लगते हैं और उसका बार-बार एक ही तरह की चीज खानी पड़ती है।
खाने में बहुत ज्यादा समय लगना
क्या खरीदना है, सामग्री के लेबल को पढ़ना है, खाना कैसे तैयार किया गया है और कौन-सा आहार सुरक्षित है—इन फैसलों में असामान्य रूप से बहुत समय जाने लग सकता है। ऐसे में बाहर जाने पर व्यक्ति को सामान्य लोगों की तुलना में आहार का चुनाव करने में ज्यादा समय लगता है।
नियम टूटने पर अपराध बोध महसूस करना
अगर व्यक्ति अपने डाइट रूल से हटकर कुछ खा ले और उसके बाद अत्यधिक अपराधबोध, डर या तनाव महसूस करे, तो यह समस्या का संकेत हो सकता है।
सामाजिक स्थितियों से बचना
पार्टी, रेस्टॉरेंट, शादी या दोस्तों के साथ खाना मुश्किल लगने लगे क्योंकि वहां “perfectly healthy” फूड उपलब्ध नहीं होगा—तो आहार संबंधी यह व्यवहार सोशल लाइफ को प्रभावित कर सकता है।
डाइट के कारण न्यूट्रिशन विविधता कम होना
डाइट में बहुत अधिक प्रतिबंधित नियम से आहार के विकल्प कम हो सकते हैं। इससे पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, फैट, विटामिन, और मिनरल्स मिलना मुश्किल हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में इससे कुपोषण होगा, ऐसा कहना सही नहीं है; इसका आकलन डाइट और व्यक्ति के नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।
ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा सिर्फ हेल्दी खाना पसंद करने का नाम नहीं है। यह उस स्थिति को बताने के लिए प्रयोग किया जाता है जिसमें हेल्दी या शुद्ध भोजन को लेकर अत्यधिक जुनून इतना बढ़ सकता है कि व्यक्ति की मानसिक शांति, न्यूट्रिशन , सोशल लाइफ और रोजाना की जिंदगी प्रभावित होने लगती है।

